किस्सा भी तेरा
खेल भी तेरे
वादा भी तेरा
झुमले भी तेरे

सारी मोहब्बत एक तरफ
और एक तरफ तेरा इश्क
जमीर भी तेरा
उसूल भी तेरे

सडक के किनारे
अकेले क्या कर रही हो
अपने आका की बेवफाई का
मातम मना रही हो

पेहले भी यजमान नशेबाज थे
अब तुझ…

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Maruti Naik

I write to remember. I write to remain honest. I write to leave a bread crumb trail for my daughter. I write to relax. Trying to impress my better half, I write